हिसार: कार से कुचलकर 5 मजदूरों की मौत के मामले में मोस्ट वांटेड मोगली अरेस्ट

हिसार: कार से कुचलकर 5 मजदूरों की मौत के मामले में मोस्ट वांटेड मोगली अरेस्ट

December 24, 2018 0 By Amit kumar
  • जिंदल पुर हुआ था हादसा 5 मजदूरो की हत्या के मामले में वांटेड था आरोपी मनोज उर्फ मोगली
  • कार की नंबर प्लेट बदलने के आरोप में भी हुई कार्रवाई
  • पुलिस ने मोगली को अरेस्ट करके अदालत में पेश कर भेजा जेल
  • गैर इरादनतन हत्या का भी मामला हुआ दर्ज

हिसार | जिंदल पुल हादसे के एक माह बाद निजी अस्पताल में दाखिल आरोपी मनोज उर्फ मोगली गुर्जर के स्वस्थ होने पर रविवार को अर्बन एस्टेट थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसे अदालत में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया है। बता दें कि डिस्ट्रिक अट्रार्नी की राय पर मोगली के खिलाफ मामले में धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के अलावा 420 और 471 भी जोड़ी है।

आरोपी ने पुलिस गिरफ्त से बचने के लिए कार की नंबर प्लेट बदली थी। हादसे के दौरान भी उसकी कार से कई नंबर प्लेट बरामद हुईं थी। वहीं, इस मामले में आईएएस के भतीजे शुभम की आर्टिगा कार से तीन मजदूरों की कुचलने से मौत हुई थी लेकिन इसके खिलाफ उक्त धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस ने तर्क दिया है कि मोगली ने हादसे के वक्त जो नंबर प्लेट कार पर लगाई थी वह शुभम की दोस्त का कार नंबर था।

उसके पास भी आई 20 कार थी और मोगली भी अपने भाई की कार लेकर घूम रहा था। तब उसका शुभम ने पीछा किया था, जिसके चलते हादसे का सबब बन गए थे। डिस्ट्रिक अट्रार्नी की राय में उसके खिलाफ उक्त आरोप नहीं बनता है। इसलिए माेगली के खिलाफ ही उक्त धाराओं के तहत कार्रवाई हुई है। थाना प्रभारी रमेश कुमार ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करके अदालत में पेश करके जेल भिजवा दिया है।

जानिए क्या था पूरा मामला, आरोपी बोला टक्कर लगने से हुई थी कार अनियंत्रित

अर्बन एस्टेट गैंगवार में मोस्ट वांटेड डीसी कालोनी वासी मनोज उर्फ मोगली को अदालत ने दोषी करार दिया था, जोकि सजा के वक्त कोर्ट से फरार हो गया था। तभी से पुलिस को उसकी तलाश थी। हादसे के 13 दिन बाद होश में आने के बाद मोगली ने अपने परिजनों को बताया था कि मर्डर केस में सजायफ्ता भाई नरपेंद्र की आई 20 कार लेकर चला गया था। पुलिस गिरफ्त से बचने के लिए हिसार सहित कई जिलों और राज्यों में छुपता फिर रहा था।

उसने कार और धर्मशालाओं को अपना बसेरा बनाया था। कार की नंबर प्लेट भी बदल लेता था। अधिकांश टाइम कार में बिताता था। जिंदल पुल हादसे से एक-दो दिन पहले पता चला था कि उसका सजायफ्ता पिता सुरेंद्र पैरोल मिलने पर जेल से बाहर आया है। उससे मिलकर पुलिस के समक्ष सरेंडर करने के लिए हिसार आया था। 20 नवंबर की देर रात को जिंदल चौक पहुंचा तो उसे आर्टिगा नजर आई।

उसमें मौजूद युवकों को देखा लगा कि वे एंटी ग्रुप के साथी हैं। ऐसे में घबरा गया था। तब उन्होंने मुझे देखकर हॉट टॉक करनी शुरू की थी। वहां से कार बैक करके जिंदल पुल की ओर जाने लगा था। उन्होंने भी पीछा करना शुरू कर दिया था। डर के कारण रेस बढ़ा दी थी। जिंदल पुल पर पहुंचा तो सामने मजदूर नजर आया। इससे पहले संभलता की अचानक कार अनियंत्रित हो गई। ऐसा लगा कि जैसे ड्राइवर साइड पीछे टक्कर लगी है। फुटपाथ से टकराकर कार पुल से नीचे जा गिरी थी। इसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता। आई 20 से 2 और आर्टिगा कार से तीन मजदूरों की मौत हुई थी।