ये अर्जुन पुरस्कार विजेता बॉक्सर आज सड़को पर कुल्फी बेचने को हुआ मजबूर,जानिए कौन है ये?

ये अर्जुन पुरस्कार विजेता बॉक्सर आज सड़को पर कुल्फी बेचने को हुआ मजबूर,जानिए कौन है ये?

October 29, 2018 0 By Vijay Kumar

अपने मुक्केबाजी करियर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दिनेश कुमार की उपलब्धियां उनके मुक्केबाजी के लिए जुनून को दर्शाता है। दिनेश कुमार ने अपने बॉक्सिंग करियर मे कई उपलब्धियां प्राप्त की है जिनमें अर्जुन अवॉर्ड भी शामिल है। मुक्केबाजी में भारत का नाम इंटरनेशनल स्तर पर ले जाने के बाद आज इस बॉक्सर की हालात बहुत खराब हो गई है।

यह बॉक्सर अब अपने जीवन यापन के लिए हरियाणा की सड़को पर कुल्फी बेचने के लिए मजबूर हो गया है। सड़क दुर्घटना में इनके पिता घायल हो गए पिता के इलाज के लिए इन्हें काफी पैसा उधार लेना पड़ा। जिस कारण यह अब पूरी तरह से कर्जे में डूब गए है। उनके पिता पर भी उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर मुक्केबाजी करने के लिए भेजने के कारण काफी कर्ज हो गया था जिसे वह चुका नही पा रहे थे। आपको बता दे कि दिनेश कुमार ने भारत के लिए मुक्केबाजी करने के दौरान 23 पदक जिते थे, जिन्में 17 स्वर्ण पदक, 5 कांस्य पदक और 1 रजत पदक शामिल है। पिता पर लगातार बढ़ रहे कर्ज के ब्याज को कम करने के लिए यह अंतराष्ट्रीय बॉक्सर आज कुल्फी बेचने पर मजबूर हो गया है।

चोट के कारण हुए थे 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर

दिनेश कुमार

दिनेश कुमार

आपको बता दे कि दिनेश कुमार को 2014 में जर्मनी में होने वाले टूर्नामेंट में बॉक्सिंग टीम में चुना गया था। लेकिन मई 2014 में सड़क दुर्घटना में वह चोटिल हो गए जिस कारण उनके दाएं कंधे में दो फ्रैक्चर भी आए थे। इस इंटरनेशनल बॉक्सर दिनेश कुमार को जुलाई 2014 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी चुना गया था लेकिन उनके चोटिल होने के दो महीने बाद ही कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने थे वह इतनी जल्द अपनी चोट से रिकवर नही हो सकते थे जिस कारण उन्हें 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में 91kg के भार वर्ग वाली बॉक्सिंग टीम से बाहर कर दिया गया।

दिनेश कुमार आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कुल्फी बेचने को मजबूर

दिनेश कुमार आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पिता के साथ कुल्फी बेचने को मजबूर।

दिनेश से हुई बातचीत में वह बोलें, “उनकी बुरी स्थिति में सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता ना मिलने के कारण वह आज अपने पिता के साथ कुल्फी बेचने पर मजबूर हो गए है। अर्जुन पुरस्कार विजेता ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि उन्होंने देश के लिए कई पुरस्कार जीते है जिसके लिए उन्हें एक सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सके। उन्होंने कहा कि उनके अंदर अभी भी बॉक्सिंग के लिए अभी भी उनके अंदर जुनून है। वह चाहते है कि एक स्थिर सरकारी नौकरी के साथ उन्हें वैश्विक स्तर पर उभर रहें मुक्केबाजो का ट्रैनिंग देने का भी मौका दिया जाए।

उन्होंने कहा, “मैंने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर खेला है। मेरे मुक्केबाजी करियर में, मैंने 17 स्वर्ण, एक रजत और पांच कांस्य पदक जीते हैं। मेरे पिता ने एक ऋण लिया ताकि मैं अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेल सकूं। ऋण चुकाने के लिए, मेरे पास ऋण चुकाने के लिए पिता के साथ आइसक्रीम बेचने के अलावा और कोई रास्ता नही है। न तो पिछले और न ही वर्तमान सरकार ने मुझे कोई मदद प्रदान की है। मैं सरकार से ऋण चुकाने में मेरी मदद करने का अनुरोध करता हूं। मैं एक अच्छा खिलाड़ी हूं। मुझे सरकार की स्थिर नौकरी की जरूरत है। बदले में, मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए युवा मुक्केबाजो को तैयार कर सकता हूं।’

दिनेश कुमार के पूर्व कोच विष्णु भगवान दिनेश का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया। उसने जूनियर श्रेणी में बहुत सारे पदक जीते लेकिन चोट के कारण हार गए और अब कुल्फी (आइस क्रीम) बेच रही है। अगर कुमार की मदद की जाती है, तो वह कर्ज के बोझ से मुक्त होगा अगर सरकार दिनेश की मदद करती है, तो वह भविष्य में जीवित रहेगा और देश के लिए अंतराष्ट्रीय बॉक्सर तैयार करने में मदद करेगा।