ऑरोविल- भारत का अनोखा शहर जहां न पैसा चलता है न एटीएम न कोई सरकार, 42 देशों के लोग रहते है एक साथ

ऑरोविल- भारत का अनोखा शहर जहां न पैसा चलता है न एटीएम न कोई सरकार, 42 देशों के लोग रहते है एक साथ

September 6, 2018 0 By Sports writer

आज हम आपको भारत के एक एेसे शहर के बारे में बताने जा रहे जहां का रहन सहन बाकी शहरो से अलग है। ऑरोविल शहर की स्थापना सन् 1968 में मीरा अल्फासा ने की थी। इस जगह को सीटी ऑफ डॉन कहा जाता है यानि भोर का शहर आप सभी को जान कर हैरानी होगी की इस शहर को बसाने के पीछे एक ही मकस्द था की लोग यहां पर जात पात ऊच नीच और भेदभाव से दूर रहे यहां पर कोई भी इंसान आकर रह सकता है लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है उसे एक सेवक के रूप में रहना होगा। इस शहर की आबादी 2,400 के करीब है इस शहर में ऐसी सुविधा उपलब्ध है कि अच्छे से अच्छा बड़ा शहर भी इसके सामने टिक नही पाता यह अपने आप में एक छोटा सा समार्ट सिटी है।

मीरा अल्फासा

मीरा अल्फासा श्री अरविंदो सप्रिचियुल 29 मार्च 1914 को पांडुचेरी आई थी और प्रथम विश्व युद्ध के बाद वह उस समय के जापान चली गई थी लेकिन साल 1920 में वह वापस पांडुचेरी आ गई और फिर 1924 में श्री अरविंदो सप्रिचियुल संस्थान से जुड़ कर जनसेवा के कार्य करने लगी। साल 1968 तक उन्होंने ऑरिविल की स्थापना कर दी जिसे युनिवर्सल सिटी का नाम दिया गया जहां कोई भी आकर रह सकता है। इस शहर में 42 देशों के लोग रहते है इनमें 30 प्रतिशत भारतीय भी है यहां स्कूल अस्पताल से लेकर यूनिवर्सिटी तक लोग की जरूरत की हर चीज मौजूद है।

यहां पर एक मंदिर भी है। हालाकि मंदिर में किसी भी धर्म से जुड़े भगवान की कोई भी फोटो या मूर्ति नही लगी हुई है और न ही यहां किसी की पूजा होती है। यहां पर लोग सिर्फ योगा करने आते है।

जाने यहां कैसे होती है खरीदारी व ट्रांजैक्शन

1985-1986 में यहां एक फाइनेशियल सर्विस सेंटर शुरू किया गया जो कि आरबीआई की तरह ही काम करता है। इसमें यहां के लोग ऑनलाईन या ऑफलाईन पैसे जमा करवाते है इसके बदले ऑरिवल फाइनेस सर्विस एक अकाउंट नंबर देता है। ऑरिवल के करीब 200 कॉर्मशियल सेंटर है छोटी बड़ी दुकान में प्राप्त अकाउंट नंबर बता कर खरीदारी की जाती है। यहा आने वाले टूरिस्टो को एक आरओ कार्ड जारी किया जाता है आपको उस कार्ड में पैसे डालने होंगे अपने डेबिड या क्रेडिड कार्य से इसी कार्ड से ऑरोविल की दुकानों में पैमेंट किया जाता है। यहां पर सेवाओं के बदले सेवाएं प्रदान की जाती है।

इस शहर मे रहना का रहन सहन मुफ्त है। ये लोग यहां की सेवाओं में अपनी मदद करते है। यहां के लोग तेल साबुन और अगरबत्ती बनाने वाले कुटीर और गृह उद्योग चलाते है इनमें से जो आमदनी होती है उसे फंड मैनजमेट इस जगह के विकास के लिए खर्च करती है। भारत सरकार की ओर से इस शहर को मान्यता प्राप्त है और सरकार भी इसे आर्थिक सहायता प्रदान करती है।